कोरोना वायरस किस तापमान में विकसित होता है और कितने तापमान में यह नष्ट होता है?




कोरोना वायरस जैसी खतरनाक बीमारी का शिकार दुनियाभर में करीब १ लाख से ज्यादा लोग बनगए है। चीन से चला कोरोना वायरस आज दुनिया के लगभग 75 देशों को चपेट में ले चुका है. चीन में इस वायरस की शुरुआत तब हुई जब वहां अच्छी-खासी ठंड थी. इसके लक्षण भी सर्दी, खांसी और बुखार से मिलते जुलते हैं जो आम सर्दी के लक्षण की तरह दिखते हैं।

ठंड में इस वायरस के बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है क्योंकि लोग घरों में कैद होते हैं, बाहर निकलने से खुद को बचाते हैं. जब ज्यादा लोग एक-दूसरे के आसपास बने रहेंगे तो इनफेक्शन तेजी से बढ़ने की संभावना होती है. कोरोना के साथ भी ऐसा ही हुआ. चीन में हालांकि कोरोना वायरस जानवरों से इंसानों में आया है लेकिन इसे बढ़ाने में ज्यादा भूमिका ठंड ने निभाई है क्योंकि लोग घरों या किसी बंद स्थान पर ज्यादा देर रुके हैं।

अब सवाल यह उठता है की गर्मी का मौसम आने से क्या कोरोना वायरस का असर कम हो जयेगा ? क्या यह खतरनाक वायरस जड़ से खत्म हो जायेगा ?
 तो इस पर अभी भी इस पर रिसर्च चल रही है, लेकिन पूर्व के दो जानलेवा वायरस सार्स और मर्स का ट्रेंड देखें तो उनका प्रसार ठंड में बढ़ा और गर्मी में गिरता चला गया, इसे देखते हुए यह कयास लगाए जा सकते है कि गर्मी बढ़ने से कोरोना वायरस का असर भी कम हो सकता है।

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सिर्फ दो महीने पहले ही दुनिया को इस वायरस के बारे में पता चला है. कोरोना वायरस फैमिली में 6 ऐसे वायरस हैं जो इंसानों को संक्रमित करते हैं. इनमें 4 से साधारण सर्दी और खांसी होती है जबकि बाकी 2 से गंभीर बीमारी होती है.लेकिन अभी यह पुख्ता सबूत सामने नहीं आये है की यह गर्मी में नहीं पनपेगा या सिर्फ ठण्ड मौसम में ही इसका असर होता है।


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नोवेल कोरोनावायरस से अब तक चीन में 2,400 से ज्यादा लोग मर चुके हैं. यह अब दो दर्जन ज्यादा देशों में फैल चुका है. इसकी वजह से कई अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कार्यक्रम रद्द हो चुके हैं. इसका पर्यटन पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है. साथ ही चीन पर प्रतिबंध की वजह अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों पर असर पड़ रहा है।

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